सीएए/एनआरसी- महत्वपूर्ण तथ्य, हम हिंदुस्तानी

CAA और NRC दोनों भाई नहीं है भाई!!!

कुछ लोग कह रहे हैं उन्हें CAA और NRC के साथ होने से आपत्ति है।पहले तो ये याद रखिए NRC पूरे देश में अभी आया नहीं पूर्वानुमान लगाना अभी से गलत होगा किसी भी चीज का। और इसकी तुलना असम से करना सरासर ग़लत। क्योंकि वो भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के असम समझौते के आधार पर हुआ था। वो भी 1985 में इसलिए उनके लिए 1971 के पेपर्स या गवाह दिखाना मुश्किल नहीं था। क्योंकि वहां बांग्लादेश से घुसपैठिए आते ही रहते थे तो उन्हें चुनाव में साबित करना पड़ता था कि वे असमिया हैं।

अब ध्यान से सुनिए!!!!📣📣📣📣📣📣
CAA केवल और केवल अल्पसंख्यक शरणार्थियों के लिए है। लोगों को लगता है कि जिन हिंदुओं को NRC नहीं मिलेगी वे CAA से वापस नागरिकता पा जाएंगे। पहले तो NRC आई नहीं तो मिलेगी क्या?😀दूसरी चंद दिनों में पूरे भारत की एक साथ बननी मुझे तो संभव लगती भी नहीं।

अहम बात!!!! CAA शरणार्थियों के लिए है वो भी दिसंबर 2014 से भारत में रह रहे हों उनके लिए। वहीं NRC भारतीय लोगों के लिए है। अब कोई नागरिकता पाने के लिए खुद को अमुक देश से आया शरणार्थी बता देगा क्या?😀 जबकि वो आसानी से ऐसे ही भारत के नागरिक होने के नाते सरलता से उपलब्ध पेपर्स को दिखाकर पा सकते हैं। NRC सभी धर्मों पर सभी नागरिकों पर लागू होगी। आप तो बीजीपी को हिंदू पार्टी बताते हो फिर वो अपने हिंदुओं को तो प्रताड़ित नहीं करेगी न आपके चक्कर में! समझे न आप??? न ही उन्हें जबरदस्ती का शरणार्थी बना देगी। अरे! अपने नागरिकों को नागरिकता आराम से दिलाएगी बिना भेदभाव के दिलाएगी।

हां! सारा खेल घुसपैठियों का है वही डर रहे हैं उन्हीं के पास कागज़ पत्तर नहीं होंगे। उन्हीं की वज़ह से बवाल मचा है उन्हीं को बचाने की साजिश है😂वैसे ये जीते जागते गवाह भी प्रस्तुत कर सकते हैं वे भी मान्य हैं बशर्ते कोई तैयार हो जाए गवाह बनने को😀पर मौके उन्हें भी एक नहीं कई दिए जाएंगे, नियमानुसार वे भी आवेदन कर पाएंगे पर नागरिक होंगे तभी तो नागरिकता पाएंगे, फ़र्जी पेपर न चल पाएंगे …. बहाने पकड़े पाएंगे… पकड़े जाएंगे !!!

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