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बदलाब जरूरी हैं

मेरी आदत है ग़लत बात बर्दाश्त नहीं!!! चुप रहकर खामोशी से सब सहना आ जाता तो कभी लेखिका न बन पाती। प्रेम और क्रोध दोनों ही आते हैं। अपनी इस आदत पर मुझे स्वाभिमान ही महसूस होता है इसी की वजह से दिमाग़ में समस्याएं और उनके उपाय स्वतः घूमते रहते हैं।

मेरा मानना है कि समय-समय पर बदलाव आने ज़रुरी है जिससे आम लोग डरते हैं। पर यकीन मानिए इन्हीं में समस्यायों के स्थाई समाधान भी छुपे हैं।

अब आप में हिम्मत है तो आप चुनौती देंगे, अपने फैसले पर डटे रहेंगे, लोग न जाने कितने आएंगे आपके मार्ग में अवरोध बनकर क्योंकि आप कुछ अलग कर रहे हो, कहा न! जिससे ज़्यादातर लोग डरते हैं। पर आप ईमानदार हैं, संकल्पबद्ध हैं अपने उत्तरदायित्व के प्रति, तो यकीन मानिए एक दिन सफ़ल भी होंगे। ऐसा नहीं है कि आपके सारे अनुमान सही होंगे क्योंकि अनुभव आगे कुछ और सिखाएगा पर दृढ़ संकल्प से युक्त व्यक्ति कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेता है। जो पहले किसी ने नहीं निकाला होगा।😊🙏

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