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CAB और NRC- आख़िरी मौका

गौर से पढें, क्यूँ भारत के अस्तित्व के लिए CAB और NRC आख़िरी मौका हैं 👇👇👇
📢 लेबनान की कहानी

70 के दशक में लेबनान अरब का एक ऐसा मुल्क था। जिसे अरब का स्वर्ग कहा जाता था । और इसकी राजधानी बेरूत को अरब का पेरिस। लेबनान एक progressive, tolerant और multi-cultural society थी, ठीक वैसे ही जैसे भारत है।
लेबनान में दुनिया की बेहतरीन Universities थीं। जहाँ पूरे अरब से बच्चे पढ़ने आते थे। और फिर वहीं रह जाते थे, काम करते थे, मेहनत करते थे लेबनान की banking दुनिया की श्रेष्ठ banking व्यवस्थाओं में शुमार थी। Oil न होने के बावजूद लेबनान एक शानदार economy थी।
लेबनान का समाज कैसा था। इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 60 के दशक में बहुचर्चित हिंदी फिल्म An Evening in Paris दरअसल Paris में नहीं बल्कि लेबनान में shoot की गई थी।

60 के दशक के उत्तरार्ध में वहाँ जेहादी ताकतों ने सिर उठाना शुरू किया। 70 में जब Jordan में अशांति हुई, तो लेबनान ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए दरवाज़े खोल दिए – _आइए! स्वागत है!_ 1980 आते-आते लेबनान की ठीक वही हालत हो गयी जो आज सीरिया की है।
लेबनान की Christian आबादी को शरणार्थी बनकर घुसे जिहादियों ने ठीक उसी तरह मारा जैसे सीरिया के ISIS ने मारा। पूरे के पूरे शहर में पूरी Christian आबादी को क़त्ल कर दिया गया। कोई बचाने नहीं आया।
किसी समाज का एक छोटा-सा हिस्सा भी उन्मादी जिहादी हो जाए। तो फिर शेष peace loving society का कोई महत्त्व नहीं रहता। वो irrelevant हो जाते हैं। लेबनान की कहानी ज़्यादा पुरानी नहीं सिर्फ 25-30 साल पुरानी है।

लेबनान के इतिहास से बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है। और कोई सीखे न सीखे भारत को लेबनान के इतिहास से सीखने की ज़रूरत है। रोहिंग्याओं, बाँग्लादेशी घुसपैठियों और सीमान्त प्रदेशों में पल रहे जेहादियों से सतर्क रहने की ज़रूरत है।
ऐसी ताकतों के विरूद्ध एकजुट होइए। जो जेहादियों की समर्थक हैं और इनका समर्थन दे रही पार्टियों , संस्थाओ, औऱ इनसे जुड़े लोगों का बहिष्कार करिए।चुप मत बैठिए। पढ़िए, समझिए और दूसरों को भी समझाइए।
🌾🌿*वंदे मातरम*🌾🌿जय भारत 🙏🙏🙏

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