दिल है हिंदुस्तानी

बलात्कारियों को भी बचाओ ?

अब कोई इतना मूर्ख तो हो नहीं सकता कि CAA और NRC में फ़र्क या ये क्यों ज़रूरी हैं ये न समझे।
असली मुद्दे पर आओ?
बहाना क्यों बना रहे हो?
रही बात हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की।
अरे! जब इन कट्टर मुसलमानों ने भारत के अंदर कश्मीर से कश्मीरी पंडितों को बेरहमी से निकाल दिया। तो इन तीनों कट्टर इस्लामिक मुल्क में हिंदुओं का क्या हाल हुआ ये किससे छुपा है?
और छुपा है तो आंखें खोल लो। देखो आस-पास असल में क्या चल रहा हैं।
ये वहां अपना त्योहार नहीं मना सकते इनकी बेटियां सुरक्षित नहीं। उनके साथ बलात्कार होता है धर्म परिवर्तन किया जाता है। इनके यहां ये अच्छा माना जाता है क्योंकि ये ऐसा करके इस्लाम को बढ़ाते हैं।

अब कोई मुस्लिम भारत इसलिए तो नहीं आया कि उसे ईद नहीं मनाने दी जाती या उसका और भी किसी प्रकार धार्मिक शोषण हुआ हो।
हाँ! ये रोजगार बेहतर जीवन की तलाश में ज़रूर आए। अरे! आना है तो तरीके से आओ जैसे पूरी दुनिया एक मुल्क से दूसरे मुल्क में कमाने खाने जाती है वैसे आओ। जैसे तुम और मुल्कों में जाते हो वैसे आओ।
मेहमानों के जैसे आओ ये चोरों की तरह क्यों आना चाहते हो?
सारी दुनिया की भुखमरी मिटाने का ठेका क्या भारत ने ही लिया है।
हमे गर्व है कि हम अपने पीड़ित लोगों को गले लगा रहे हैं।
और ये मुस्लिम सिर्फ़ दिखावे के लिए अवैध कब्जा करने के लिए एक हैं।
क्यों नहीं इनके इस्लामिल मुल्क़ इन्हें नागरिकता देते???
भारत से ही नाज़ायज मांग क्यों???
क्योंकि इन्हें इस्लाम बढ़ाना है फैलाना है ये फंड देते हैं लेकिन नागरिकता नहीं। समझों इनकी चालें।

आज़ादी के वक्त पाकिस्तान में कुल 428 मंदिर थे, जिनमें से अब सिर्फ 26 ही बचे हैं। विभाजन से पहले मुसलमानों की संख्या भारत की कुल आबादी का 10 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर लगभग 15 प्रतिशत हो गई है।
वहीं पाकिस्तान में हिंदू 22 प्रतिशत से घटकर 1.6 प्रतिशत रह गया है 1998 की पाक जनगणना के हिसाब से। आखिर क्यों?

सोचिए! देशवाशियों सोचिए! ईमानदारी से सोचिए!

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