सीएए/एनआरसी- महत्वपूर्ण तथ्य, हम हिंदुस्तानी

बेईमानों के साथ ईमानदारी ???

बात हिंदू-मुस्लिम की नहीं, बात असहाय को सहारा-आसरा देने की है, बात आबरू बचाने की है, बात मानवता दिखाने की है, बात जायज़ और नाज़ायज मांग की है….

मैं भी सेक्युलर थी लेकिन जब  सेक्युलिरिज्म का गलत फायदा उठाते देखा, मेरे अंदर का सेक्युलिरिज्म मर गया।जब सेक्युलिरिज्म की बात देश का कोना-कोना करे और ईमानदारी से करे, तो अच्छा है, लेकिन बेईमानों के साथ ईमानदारी दिखाना तुम्हारी सत्यता नहीं मूर्खता दिखाती है।

शत्रु के साथ मित्रता दिखाना तुम्हारी दुर्बलता दिखाती है और हां न मैं दुर्बल हूं न मूर्ख क्योंकि ताकत बाजुओं से नहीं विचारों से आती है, उनकी तलवार में वो दम नहीं जितना मेरी कलम धार रखती है.

© ® कुसुम गोस्वामी

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