सीएए/एनआरसी- महत्वपूर्ण तथ्य, हम हिंदुस्तानी

कुछ तो शर्म करो…

भारत जहां कभी किसी धर्म के साथ भेद-भाव नहीं हुआ। इसका सबसे बड़ा सबूत कुछ मंद बुद्दि के सेक्युलर लोग हैं। जो आज इन झूठे फरेबी मुस्लिम भाई-बहनों के सच्चे दोस्त बनकर अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

अरे! तुम्हारी भावना, सारी मानवता तब क्या घास चरने चली जाती हैं जब पाकिस्तान, अफगानिस्तान में हिंदुओं का शोषण होता है? अपने देश में मोमबत्ती लेकर जलूस निकालते हो वहीं बँटवारे की पीड़ा झेलते हिंदू भाई-बहनों और उनकी बेटियों की इज्ज़त इन मुल्कों में लगातार लूटी जाती रही है उनके प्रति तुम्हारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती। क्यों वहाँ सेक्युलर होने का पदक नहीं मिलगा इसलिए? तुम उन्हें जानते नहीं इसलिए?  अरे! पाकिस्तान तो छोड़ो भारत में अभी 1990 में क्या हुआ पता नहीं? किस तरह अपने मुल्क से… अपने मुल्क! से समझे! भगाया गया… भगाया गया! मार के, रेप करके नहीं पता? जो अभागे आज भी देश के अनेक हिस्सो में शरणार्थी बनकर रह रहे हैं। करो! कुछ इनके लिए भी करो…  

इन पीड़ित हिंदू भाई-बहनो का साथ देना तुम्हारा फर्ज है,मानवता है, देशभक्ति है। लेकिन हमारे दुश्मन मुल्क जिन  घुसपैठियों का साथ दे रहे हैं तुम उनका साथ दे रहे हो फिर गद्दार किसे कहेंगे? तुम्हें कहते है गद्दार तो क्या गलत कहते हैं? 

अरे! पाकिस्तान और दूसरे मुल्कों के मुस्लिमो की तरह अगर अपनी कौम का साथ देते तो आज सीएए/एनआरसी लाने की जरूरत ही न पड़ती। भारत में अगर एक मुस्लिम को खँरोच भी लग जाए तो पाकिस्तान में हिंदुओं के ऊपर कहर ढ़ाए जाते है। ऐसे ही नर्क में जी रहे हैं वे उन्हें और पीड़ा पहुँचाते हैं।  लेकिन अब ऐसा  नहीं चलेगा। हमारे देश के आंतरिक मामलों में किसी की दखलअंदाजी नहीं चलेगी ।

अब ध्यान से सुनना,  जितना ये मुस्लिम मुस्लिमों का साथ देते हैं गलत-सही कुछ नहीं देखते अगर तुम हिदुओं ने दिया होता हिंदू का साथ, न्याय का साथ, तो सीएए/एनआरसी लानी ही नहीं पड़ती। ये वहीं सुरक्षित होते।

आज भारत सरकार इन पीड़ितो का साथ दे रही है इस बात पर हम सरकार का साथ दे रहे हैं न्याय  का मानवता का साथ दे रहे है तो तुम्हें शरम नहीं आती हमें ही गलत बता रहे हो?

अगर हम गलत तो तुम गद्दार हुए। नाजायज मांग रख रहे हो क्योंकि तुम्हें डर है तुम्हारे मुस्लिम भाई को देश न छोड़ना पड़ें। अगर तुम्हारा भाई या उसके माता-पिता अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं तब तो उन्हें डरना ही  चाहिए।

हर देश एयरपोर्ट पर करोड़ों रुपए खर्च करता है अवैध देशान्तरण  (इल्लीगल माइग्रेशन) को रोकने के लिए और जो सीमा पार कर के लाखों लोग ऐसे बिना वीजा के बिना अनुमति के घुस आए उसका क्या? क्या ये भारत पर किसी आक्रमण से कम है???

आज एक अपराधी की माँ उसे बचाने आ जाए, “नहीं!-नहीं! मेरा बेटा है इसे कुछ न करो छोड़ दो, ” तो क्या वो सही हो जाएगी क्या हम मानवता दिखाने के लिए उसका साथ देंगे या इंसाफ करेंगे।

देश के नौजवानों के क्या परिवार नहीं होते??? वो देश की सुरक्षा के लिए जान दे देते हैं और एक तुम हो गलत मांग रखकर अपने देश को जला रहे हो। और इल्जाम भारत सरकार के ऊपर।

तुम कभी पाकिस्तान में  पीड़ित हिन्दुओ के लिए जुलूस निकालना, धरणा  देना, उस दिन मैं तुम्हें सलाम करूंगी। मान जाऊँगी सच में तुम्हारे अंदर इंसानियत है। बल्कि हिंदू ही क्यों? किसी भी धर्म पर दुनिया में अन्याय हो तो जुलूस निकालना, पूरी दुनिया तुम्हारे जज़्बातों की कद्र करेगी।

मांग जायज हो तो मानी भी जाए लेकिन नाजायज मांग क्यों मानी जाए???

हमें सही होकर भी गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हो। और तुम गलत… ( गलत शब्द भी छोटा है) होकर खुद को सही साबित कर रहे हो। मानवता की बातें जैसे हमारे अंदर जज़्बात नहीं? हमारे अंदर जज़्बात भी हैं अकल भी है और देश भक्ति भी है, तुम्हारी तरह क्षणिक भावनाओं  या किसी लालच में पड़कर देश के साथ गद्दारी नहीं कर रहे। हमारे भी मुस्लिम भाई-बहन दोस्त है हम उनकी इज्ज़त करते हैं लेकिन हिन्दू मुस्लिम कोई भी भटककर, स्वार्थवश  गलत मांग रखता है हम वहाँ उसके साथ नहीं है। ये कमुनालिस्म नहीं, दूरदर्शिता कहलाती हैं।

भाई! हमारे पीड़ित शरणार्थी कश्मीरी भाइयों के लिए कभी प्रदर्शन क्यों नहीं किया ??? जानते भी हो इतिहास या नशे में ही रहते हो। दो इनका साथ, वापस! दिलाओ इनके देश में इनका घर, सम्मान,  ऐसे प्रदर्शन में बुलाना हम भी तुम्हारे साथ आएंगे। रखना मांग पाकिस्तान के खिलाफ कि वो वहाँ हिंदुओं के साथ अन्याय न करे, उस जुलूस में हम भी आएंगे।

अपने निजी स्वार्थ को मानवता का जामा मत पहनाओ। मानवता भेद-भाव नहीं करती फिर रोको न जुल्म इन देशों के बाकी बचे हिंदुओं पर। हाँ! मानवता भी न्याय-अन्याय में फर्क करती है जायज-नाजायद के साथ भेदभाव दिखाती है। इसलिए हम तुमको बुरे ही लगे चाहे पर हम सच के साथ है, अपने फर्ज़ के साथ है, तुम इसके विपरीत हो। पढ़ा था भारत अपने लोगों से ही हारा है, अब  देख भी रही हूँ। अभी तुम्हें  न्याय-अन्याय का फर्क नहीं पता मानवता और मूर्खता के बीच का अंतर नहीं पता। हममें एकता नहीं।

चाइना में ही नहीं पूरी  दुनिया में कितने कठोर नियम-कायदे  हैं इन मुसलिमों के लिए क्या नहीं पता? कितने देश हैं जहां इन पर प्रतिबंद है ये भी तुम्हें नहीं पता? तो पता करो मेरे सेकुलर भाइयों! पता करो गूगल पर सर्च करके देखो न क्या होता है हिंदू भाई-बहनों के साथ पाकिस्तान, बंगलादेश में और क्या हुआ था खुद तुम्हारे कश्मीर में इनके साथ।

सच जरूर खोजना, कम से मांग करने के पहले इतना तो पता रहे कि तुम्हारी मांग नाजायज है, स्वार्थ से पूर्ण है गूगल जरूर कर लेना… ईश्वर आपको सही गलत समझने की क्षमता दे।

©® कुसुम गोस्वामी

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