हम हिंदुस्तानी

क्या आप भी कभी हाथ बढ़ाएंगे…?

मन की बात

मैं एक लेखिका हूँ मेरी रचनाएं मेरी सोच दर्शाती है। मैंने हर धर्म की बराबर इज्ज़त की, खुशियाँ बांटीं। पढ़िए मेरी FB वाल को (https://www.facebook.com/kusumgoswamikim) कुछ पोस्ट मेरे पेज Kim’s Feelings and Friends https://www.facebook.com/goswamikim पर भी मिल जाएंगी। मैंने महसूस किया एक के सेक्युलर होने का फायदा दूसरा उठाता है। कहीं संतुलन ही नहीं बनता। एक दिल से सेक्यूलिजम को अपनाता है तो दूसरा मात्र स्वार्थ के लिए। हालांकि सारे लोग ऐसे नहीं हैं लेकिन अधिकांश लोगों की मानसिकता ऐसी ही हैं।

 अगर दो गुटों में झगड़ा चल रहा है ऐसे में आप सही-गलत देखकर एक का पक्ष लेते हैं  फिर वहाँ जात धर्म कहाँ से आ जाते हैं? अगले ने उचित-अनुचित देखकर निर्णय लिया, धर्म को बीच में लाकर पक्षपात तो आप कर रहे हैं।  

अपनी ही बात करती हूँ जब CAA और NRC पर विवाद बढ़ा तो मैंने उचित-अनुचित दोनों के बारे में सोचा फिर जो उचित था उसका साथ दिया यहाँ अब जरूर धर्म अपने आप बीच में आ गया। मैंने राम मंदिर पर निर्णय आने पर कभी जय श्री राम! का नारा नहीं लगाया हाँ! हिंदू हूँ, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया तो खुशी जाहिर सी बात है हुई। लेकिन मैंने अपनी खुशी से औरों को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं की। बल्कि यही माना और दोहराया कि कोई हारा-जीता नहीं! इस पर मेरा कई हिंदुओं ने विरोध किया, मैंने उनके सामने अपना मत रखा।

अभी हैदराबाद गैंगरेप-मर्डर, प्रियंका रेड्डी केस में जब उन चारों अपराधियों में से सिर्फ मुस्लिम के नाम पर पूरी कौम को घसीटा जा रहा था तब मैंने विरोध किया कि इसमें मज़हब कहाँ से आ गया। दरिंदों का कोई मज़हब नहीं होता। आप पढ़ सकते है, CAA और NRC मुद्दे के पहले मेरे पेज Kim’s Feelings and Friends पर वही पोस्ट थी।

दिवाली पर मैंने पटाकों के अनियंत्रित उपयोग पर अपना विरोध जताया। जबकि मैं तो हिन्दू हूँ मुझे क्या आपत्ति हो सकती थी? लेकिन मैंने उसमें सुप्रीम कोर्ट के अनुसार दी हुई गाइड लाइन का प्रयोग करने को उचित बताया और बहुत से हिन्दू भाई-बहनों की नाराजगी झेली।

बात करते हैं यातायात के नए नियमों की, मैंने वहाँ भी सरकार का साथ दिया। बात केजरीवाल सरकार के ऑड-ईवन की थी, मैं उन्हें पसंद करती हूँ या नहीं ये अलग बात है लेकिन मुझे ये नियम उचित लगा तो मैंने समर्थन किया।

मैं अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में हमेशा जागरूकता लाने की कोशिश करती हूँ। जो सत्य है वो सामने लाने की कोशिश रहती है अब वो किसी के पक्ष में तो किसी के विपक्ष में जाएगा ही। ज़रूरी नहीं की सब सहमत हों लेकिन सोचते समय मैं निष्पक्ष होकर ही सोचती हूँ बाद में वो जरूर किसी एक के पक्ष में जाता है। मैं कभी स्वार्थी बनना भी चाहूँ तो मेरी अंतरात्मा बनने नहीं देगी।

मैंने इस प्रकरण के शुरू में कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की लेकिन जब बात बढ़ते देखा, धर्म को बीच में घुसते देखा, तो चुप नहीं रह पाई और अपने ब्लॉग के माध्यम से आपके सामने सच लाने का प्रयास किया। बाकायदा वाद-विवाद किया ये सब सिर्फ सत्य को सामने लाने के लिए लेकिन कुछ लोगों की आदत है सत्य देख नहीं पाते बल्कि सत्य को कटघरे में खड़ा कर देते हैं। ये कैसा सेक्यूलिजम है? आप कैसी अपेक्षा करते हैं हमसे?

CAA और NRC का विरोध करने वालों से विचारों का मतभेद है। इनके खुद के विचारों और स्वार्थ में मतभेद है। असम वाले हिन्दू- मुस्लिम कोई भी हो CAA नहीं देना चाहते। कुछ लोग बिना बात जज़्बाती होकर विरोध में खड़े हैं। कुछ देश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता में हैं इसलिए विरोध करना था। ये गिरती GDP के लिए क्यों नहीं  जुलूस निकालते? असल मुद्दे पर कोई और रंग लगाकर विरोध क्यों? जो गलती है सजा उसकी ही देना चाहिए न, हालांकि मैं यहाँ भी आपसे यहीं कहूँगी इतने विरोध होंगे, दंगे होंगे तो देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचेगा, बिना मतलब अपने देश के विकास को रोकिए मत। सरकार को अपना काम करने दीजिए आपसे ज़्यादा चिंता उसे हैं।

अब बाकी बचे लोग ये विरोधी पार्टियों का साथ देने के लिए या अपनी राजनीति चलाने के लिए विरोध कर रहे हैं। ये मत भूलें ये मुस्लिम वोट पाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, फिर इल्जाम बीजेपी पर कम्युनल होने का क्यों? वो जो है कम से कम छुपाती तो नहीं ।

मेरा किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं, लेकिन सत्य से है और मैं उसके साथ हूँ। हिंदू होने का गर्व है लेकिन घमंड नहीं। मैं भावुक हूँ लेकिन कमजोर नहीं। किसी पर विश्वास करती हूँ पर अंधविश्वसि नहीं। सत्य का साथ देती हूँ स्वार्थी नहीं।

इसलिए अंत में कहना चाहती हूँ हर आदमी जो CAAऔर NRC का सपोर्ट कर रहा है ज़रूरी नहीं कि वो कट्टर हिंदू या मोदी भक्त ही हो। हम निस्वार्थ इसका समर्थन कर रहे हैं।  लेकिन जो इसका विरोध कर रहे हैं वे जरूर कट्टर मुस्लिम या कट्टर मुस्लिमों द्वारा भड़काए गए हिंदू या मुस्लिम हैं। बाकी स्वार्थी लोग भी लगे हैं। CAAऔर NRC क्यों जरूरी है ये मैं अपनी अन्य पोस्ट में बता ही चुकी हूँ।  लेकिन ये सत्य है कि सत्य की बात वहाँ की जाती है जहां उसका मान रखा जाता है, न्याय की बात वहाँ की जाती है जहां उसका सम्मान रखा जाता है। धर्म निरपेक्षता की बात वहाँ की जाती है जहां लोग निष्पक्ष हो। स्वार्थवश अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए दूसरे की आँखों पर धर्मनिरपेक्षता की जो पट्टी बांधी जा रही है वह मैं देख रही हूँ। यहाँ सेक्युलर होने की बात वे कर रहे हैं जिनका धर्म ही दूसरे धर्म को नकारता है। ऐसी विनाशकारी विचारधारा के विपरीत जिस व्यक्ति की विचारधारा होगी उसे ही दूसरा धर्म भी अपनाएगा।  लेकिन अगर आप कट्टर मानसिकता रखेंगे तो हम कहाँ से और क्यों नरमी लाएँगे? कब तक सेक्यूलिजम का पहाड़ अपने सर पर उठाएंगे।
क्या आप भी कभी हाथ बढ़ाएंगे…?
©®कुसुम गोस्वामी

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