सीएए/एनआरसी- महत्वपूर्ण तथ्य

शाहीन बाग वाली आजादी?

कालेधन और भ्रस्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे योगगुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 4/5 जून 2011 की आधी रात दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज की इसमें रामदेव के अनगिनत समर्थक और राजबाला गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. दिल्ली के जी बी पंत अस्पताल में 114 दिन के इलाज के बाद राजबाला का निधन हो गया था। ख़ुद रामदेव जान बचाने के लिए 12 फिट ऊँचाई से कूदकर महिलाओं की वेश भूषा में छुपकर भागे थे।

ठीक ऐसी ही तानाशाही घटना घटित हुई थी जब इमरजेंसी 1975 में आधी रात को इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की और रातों रात विपक्ष के नेताओं को जगाकर गिरफ्तार कर लिया। संविधान में तमाम संशोधन करते हुए धर्म निरपेक्ष शब्द जबरदस्ती जोड़ा गया।

पुरुषों की जबरन नसबंसी की गई जिसमें कई हज़ार पुरुषों की मौत हुई जिन्हें छुपाया गया। मीडिया पर पहरा लगा बिना इज़ाज़त कोई खबर नहीं छप सकती थी। यहां तक की लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए।

ये तानाशाही नहीं थी तो क्या थी???

और इसका एक प्रतिशत भी अगर शाहीन बाग में हो जाए तो सबकी अकल ठिकाने आ जाएगी। और पता चलेगा की कानून व्यवस्था क्या चीज होती है…

जय हिंद

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