दिल्लगी

बेवजह खुशी

यूं तो भी खुश हो सकते हैं गम को भगाने के लिए, और वजह तलाशों तो वजह भी हजार मिलेंगी खुश रहने के लिए... © कुसुम गोस्वामी 'किम' (चित्र सौजन्य: इंटरनेट)

दिल्लगी

प्यारी बेटियां

हर आंगन की शान होतीं हैं, ये बेटियां, अपने बाबुल का मान होतीं हैं, ये बेटियां किसी रोते चेहरे की मुस्कान  के जैसी, तपते रेगिस्तान मे फुहार हैं,  ये बेटियां हमारे गम से नम हो जाती हैं इनकी आँखें, ऐसी भावुक होती हैं, ये बेटियां प्यार के रंग बिखेर देती हैं जीवन में, इतनी प्यारी… Continue reading प्यारी बेटियां

दिल्लगी

मासूम मन की फरियाद

नन्हीं उंगलियो ने थाम ली मेरी कलाई, कहीं जाते -जाते, मैं वहीं ठहर गई ! हाँ थी मैं बड़ी ही जल्दी में, अपनी ही धुन अपनी ही मस्ती में ! उसने न जाने क्या जादू कर दिया, मासूम आँखों से कुछ कह दिया ! दिल में ममता की लहर उभर गई, मैं उसकी प्यारी सूरत… Continue reading मासूम मन की फरियाद

दिल्लगी

सच्ची खुशी

हम जा रहे थे डीलक्स कार से, वो रिक्शा चला रहा था ! हम एसी में बैठे थे, वो पसीना पूछा रहा था ! हम जाम लगा देख भुनभुना रहे थे, वो रिक्शा रोककर मुस्करा रहा था ! हमारा ध्यान घड़ी की सुइयों पे था, वो बेफिक्री से घूम रहा था ! हम होटल में… Continue reading सच्ची खुशी

दिल्लगी

काश कुछ ऐसा हो जाए

काश कुछ ऐसा हो जाए हाँ कोई जादू हो जाए नाम  तेरा  होठों पे आए और तू हाजिर हो जाए काश कुछ ऐसा हो जाए बादल पूछ के जल बरसाए कभी  धरती सूखी न रह पाए कहीं फिर बाढ़ नही आए काश कुछ ऐसा हो जाए हर जुमॆ ही मिट जाए बेफ्रिक हम घर से… Continue reading काश कुछ ऐसा हो जाए

दिल्लगी

सूरज का पैगाम हम सबके नाम

रात की गहरी नींद के बाद, सुबह का सूरज रात के बाद ! आँखे  मींजे उगता सूरज. हम सबको जगाता सूरज  ! कानों में कुछ कह जाता. जीने का पाठ सिखाता ! मैं सुबह जल्दी उठ जाता. जग में तभी प्रकाश फैलाता ! चली गई रात की कालिमा, जब मैंने फैलाई लालिमा ! उठ जाओ… Continue reading सूरज का पैगाम हम सबके नाम

दिल्लगी

दुआ है मेरी रब से

मेरे सभी मित्रों के लिए ये दुआ है मेरी रब से, तेरी हर दुआ कबूल हो जाए ! खुशियों में तो , तू खुश रहे सदा, गम में भी तेरी आँख न भर पाए !! ©®कुसुम गोस्वामी

दिल्लगी

छुपी खुशी 

खुशियों की राह देखोगे तो वो कभी न पास आएंगी तुम्हारे क्योंकि वो तो न जाने कब से दिल में छुपी बैठी है तुम्हारे गम, ईष्या, लालच, क्रोध का साया जाने किस-किस को तूने अपनाया कभी इन्हें भुलाकर देखो खुशी तभी आएगी बुलाकर देखो नही तो वह रुठकर चली जाएगी गम या खुशी एक ही… Continue reading छुपी खुशी 

दिल्लगी

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं

"फिज़ा में लहराऊं तेरे संगतू डोर मैं एक पतंग" 🎈 ❤️💐सभी आदरणीय मित्रों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं🙏💐❤️