दिल्लगी

प्यार

प्यार.... किसी के लिए अनमोल होता है किसी के लिए खेल होता है जिसे मिला वही समझे इसकी माया दूर से से तो सोना भी पीतल लगता है © कुसुम गोस्वामी 'किम' (चित्र सौजन्य: इंटरनेट)

परिचय

सपनों की ज़मीं

मैं कुसुम गोस्वामी, दिल्ली की रहने वाली हूं . देश की तमाम जानी-पहचानी मासिक पत्रिकाओं में समय-समय पर कहानियां और कविताएं प्रकाशित होते रहे हैं. आकाशवाणी से भी जुड़ी हूं. वहाँ से मैंने अपनी कहानियां, व्यंग्य और कविताएं प्रस्तुत की हैं. शीध्र ही आपके सम्मुख अपने पहले उपन्यास के साथ प्रस्तुत होउंगी…