हम हिंदुस्तानी

प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं

जिस पॉपकॉर्न और कोल्डड्रिंक को हम बाहर 30-30 रुपये में पीते हैं उसकी कीमत उछलकर अचानक सिनेमा हॉल में 300-400 तक पहुंच जाती है।और टिकटों के आसमान छूते मूल्यों का क्या कहना। एक स्टार को स्टार, आम से ख़ास हम ही बनाते हैं। लखपति से करोड़पति फिर अरबपति हमारी जेब से झड़े पैसे ही बनाते… Continue reading प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं

दिल्लगी

शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

तू काल है तू कृपाल है, तू आदि है तू अंत है, तू वेद है तू पुराण है, तू आकाश है तू पाताल है, तू अग्नि है तू रस की धार है, तू सारे संसार में तुझ में सारा संसार है!   ©® कुसुम गोस्वामी   🌺🌼सभी आदरणीय मित्रों को शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं🌺🌼 देवों… Continue reading शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

दिल्लगी

बेवजह खुशी

यूं तो भी खुश हो सकते हैं गम को भगाने के लिए, और वजह तलाशों तो वजह भी हजार मिलेंगी खुश रहने के लिए... © कुसुम गोस्वामी 'किम' (चित्र सौजन्य: इंटरनेट)

दिल्लगी

प्यारी बेटियां

हर आंगन की शान होतीं हैं, ये बेटियां, अपने बाबुल का मान होतीं हैं, ये बेटियां किसी रोते चेहरे की मुस्कान  के जैसी, तपते रेगिस्तान मे फुहार हैं,  ये बेटियां हमारे गम से नम हो जाती हैं इनकी आँखें, ऐसी भावुक होती हैं, ये बेटियां प्यार के रंग बिखेर देती हैं जीवन में, इतनी प्यारी… Continue reading प्यारी बेटियां

दिल्लगी

मासूम मन की फरियाद

नन्हीं उंगलियो ने थाम ली मेरी कलाई, कहीं जाते -जाते, मैं वहीं ठहर गई ! हाँ थी मैं बड़ी ही जल्दी में, अपनी ही धुन अपनी ही मस्ती में ! उसने न जाने क्या जादू कर दिया, मासूम आँखों से कुछ कह दिया ! दिल में ममता की लहर उभर गई, मैं उसकी प्यारी सूरत… Continue reading मासूम मन की फरियाद

दिल्लगी

सच्ची खुशी

हम जा रहे थे डीलक्स कार से, वो रिक्शा चला रहा था ! हम एसी में बैठे थे, वो पसीना पूछा रहा था ! हम जाम लगा देख भुनभुना रहे थे, वो रिक्शा रोककर मुस्करा रहा था ! हमारा ध्यान घड़ी की सुइयों पे था, वो बेफिक्री से घूम रहा था ! हम होटल में… Continue reading सच्ची खुशी

दिल्लगी

काश कुछ ऐसा हो जाए

काश कुछ ऐसा हो जाए हाँ कोई जादू हो जाए नाम  तेरा  होठों पे आए और तू हाजिर हो जाए काश कुछ ऐसा हो जाए बादल पूछ के जल बरसाए कभी  धरती सूखी न रह पाए कहीं फिर बाढ़ नही आए काश कुछ ऐसा हो जाए हर जुमॆ ही मिट जाए बेफ्रिक हम घर से… Continue reading काश कुछ ऐसा हो जाए

दिल्लगी

सूरज का पैगाम हम सबके नाम

रात की गहरी नींद के बाद, सुबह का सूरज रात के बाद ! आँखे  मींजे उगता सूरज. हम सबको जगाता सूरज  ! कानों में कुछ कह जाता. जीने का पाठ सिखाता ! मैं सुबह जल्दी उठ जाता. जग में तभी प्रकाश फैलाता ! चली गई रात की कालिमा, जब मैंने फैलाई लालिमा ! उठ जाओ… Continue reading सूरज का पैगाम हम सबके नाम

हम हिंदुस्तानी

ऐ! मेरे वतन के लोगों

ऐ! मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर लो पानी, इतनी जल्दी कैसे तुम भूले कश्मीर की वो दर्द भरी कहानी... कश्मीर में हिंदुओं पर कहर टूटने का सिलसिला 1989 जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लाम ने शुरू किया था।14 सितंबर 1989 को भाजपा के नेता पंडित टीका लाल टपलू को कई लोगों के सामने… Continue reading ऐ! मेरे वतन के लोगों